
नारी शक्ति वंदन अधिनियम2023 के समर्थन में गैरराजनितिक नेत्रियों द्वारा प्रेस वार्ता कर महिलाओं से माँगा समर्थन
बिलासपुर ===
श्रीमती पुष्पा पाटले, श्रीमती स्वातिअग्रवाल श्रीमती नेहा सिंह राजपूत द्वारा मगरपारा स्थित होटल सिल्वर ओक में प्रेसवार्ता आयोजित कर महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए भाजपा की मोदी सरकार को धन्यवाद ज्ञापित किया मोदी सरकार के समर्थन में उतरे तीनो नेत्रियों ने इस पुरे वार्ता को गैर राजनितिक करार दिया. इस विधेयक के संबंध में चर्चा के दौरान अपना अपना मत रखते हुए तीनो नेत्रियों ने महिलाओ की भागीदारी रष्ट्र निर्माण में 50% होना एवं आधा जिम्मेदारी निभाने की बात रखी. उक्त विधेयक का लंबे अरसे से चर्चा ठंडे बस्ते में पड़े रहने से महिलाओं की भागीदारी अलग अलग राजनितिक दल अपने सहूलियत अनुसार तय करते थे पर अब ऐसा नहीं होगा महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित किसी भी हाल में नहीं किया जा सकता.तीनो नेत्रियों के चर्चा का सार है की 33% आरक्षण महिलाओ को नई दिशा और दसा प्रदान करेगी साथ ही उन्होंने सभी महिलाओं से अपील करते हुए विधेयक का समर्थन करने केलिए मो. नंबर 9667173333 मिस्ड कॉल करने का आग्रह किया है जिससे इस बिल को भरपुर समर्थन मिल सके.
महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर पहली बार चर्चा और इसे संसद में पेश 12 सितंबर 1996 को किया गया था। यह 11वीं लोकसभा के दौरान एच.डी. देवेगौड़ा सरकार द्वारा 81वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए
सीटें आरक्षित करना था।
मुख्य तथ्य:
पहली बार पेश: 1996 में एच.डी. देवेगौड़ा सरकार द्वारा।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार: 1998, 1999, 2002, 2003 में इसे दोबारा लाने के प्रयास हुए, लेकिन असफलता मिली।
2010 का प्रयास: मनमोहन सिंह सरकार के समय यह बिल राज्यसभा से पारित हुआ, लेकिन लोकसभा में लंबित रहा।
ऐतिहासिक सफलता: 27 साल के संघर्ष के बाद, सितंबर 2023 में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा यह बिल ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में संसद से पास किया गया।
यह बिल सालों तक राजनीतिक सहमति न बनने के कारण संसद में लंबित रहा था।
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान (128वां संशोधन) विधेयक, 2023 या नारी शक्ति वंदन अधिनियमके नाम से जाना जाता है, लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% (एक तिहाई) आरक्षण अनिवार्य करता है। सितंबर 2023 में पारित यह विधेयक अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है और अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन के बाद 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
महिला आरक्षण विधेयक 2023 के प्रमुख विवरण:
पारित होने की तिथि: यह विधेयक लोकसभा द्वारा 20 सितंबर, 2023 को और राज्यसभा द्वारा 21 सितंबर, 2023 को पारित किया गया था।
लक्ष्य: निर्णय लेने वाले निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, जो ऐतिहासिक रूप से कम रही है।
कार्यान्वयन: अधिनियम के लागू होने के बाद आयोजित पहली जनगणना के परिणाम प्रकाशित होने के बाद आरक्षण प्रभावी होगा, जिसके बाद सीटों के आरक्षण के लिए परिसीमन प्रक्रिया होगी।
सीटों का रोटेशन: कानून द्वारा निर्धारित अनुसार, प्रत्येक परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का रोटेशन किया जाएगा।
समाप्ति अवधि खंड: आरक्षण प्रारंभ में 15 वर्षों की अवधि के लिए है, हालांकि इसे संसद द्वारा निर्धारित समय तक जारी रखा जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
इस विचार पर 27 वर्षों से अधिक समय से बहस चल रही है, जिसके पूर्व संस्करण (1996, 1998, 1999, 2008) या तो पारित नहीं हो सके या लोकसभा के भंग होने पर निरस्त हो गए। 2010 का संस्करण राज्यसभा द्वारा पारित किया गया था, लेकिन लोकसभा द्वारा कभी पारित नहीं किया गया।
वर्तमान स्थिति और प्रभाव:
अप्रैल 2026 तक, यह कानून जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के लागू होने की प्रतीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य आगामी आम चुनावों तक इसे पूरी तरह से लागू करना है। इस कानून को भारतीय राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण, हालांकि कुछ विलंबित, कदम के रूप में देखा जा रहा है।


